Tuesday, 23 July 2013

LEFT HAND

you ALWAYS touched ,FELT ,LOVED ME WITH YOUR RIGHT HAND .
WHAT WAS IN YOUR LEFT HAND ? 
IT WAS YOU (?)

YOU

ginger, cumin ,coriander ,chilly turmeric 
all reminding me of you .
you had no sense of cooking 
but 
you made sense in my life ..

FATHER

YOUR FATHER IS THE FIRST PERSON 
WHO FANTASIZES ABOUT YOU IN BRIDAL DRESS .
HE DECIDES 
WHO WILL MAKE LOVE 
TO YOU
AFTER MARRIAGE

a poem dedicated to KAFKA

बालकनी में
गमलो में लगे पौधे
लगते हैं काफ्का के किसी उपन्यास के किरदार,
अस्तित्व है भी और नहीं भी
पत्तियों का ज्यादा हरा होना
और टहनियों का गीला रहना 
एक अजनबी उदासी है ,
उलझनों से भरा
जैसे किसी अदालत की कचेहरी में खड़ा हो 
और ये भी न पता हो की गुनाह क्या है,
काफ्का खुद यहाँ आए तो बताये इसको
इसकी कहानी,
हर रोज़ सुबह एक ब्राह्मण धोता है अपने पाप
पौधों में पानी डालकर,
ये ब्राह्मण काफ्का को नहीं समझता
न ही इसे ये पता है
ये पौधों को सांस दे रहा है या गुलामी
ये वही चौकीदार है
जिसका जिक्र
काफ्का ने एक उपन्यास में किया था.

Translating a poem


मुझे एक ऐसा घर दो जो मेरा न हो ,
जहाँ मैं आ और जा सकूँ 
बिना किसी सुराग के ,

कभी भी चिंता किये बिना 
नलसाजी ,
पर्दों के रंग ,
बिस्तर के पास किताबों के बेसुरेपन की ,
एक घर जो मैं पहन सकूँ हलके से ,
जहाँ कमरे बंद न हो
कल की बातों से ,
जहाँ आत्मा फूली हुयी न हो
दरारे भरने के लिए

एक घर , इस शरीर जैसा
कितना अनजान जब मैं सम्बन्ध रखने की कोशिश करूँ,
कितना सत्कार करने वाला
जब मैं निश्चय करूँ
मैं सिर्फ देखने आई हूँ
-ARUNDHATHI SUBRAMANIAM

Friday, 7 June 2013

thinking

IM THINKING
OF GROWING TREES ON MY PALMS 
TREES ARE AS GREEN AS YOUR SUIT,
YOU WORE LAST NIGHT

हो सकता है तुझे बड़ा अजीब लगे

हो सकता है 
तुझे  बड़ा अजीब लगे ,मैंने अपने नाख़ून बढ़ा  लिए हैं वक़त को खुरेदना चाहता हूँ तब तक जब तक ये नज़र ना आ जाये तुम पहले दिन कैसे दिखते  थे इतना उलझ गया हूँ तुझमे और तुझसे सम्बंधित चीजों में कोई हिसाब नहीं रहता बस इतना सा याद है जिस दिन नमकीन चने मिले उस दिन सोमवार होता है ,तुम्हारे झूठे चमच का पास पड़े होना तुम्हारा पास बैठे होना लगता है